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My professor is my sugar daddy

कुणाल एक कदम पीछे हटे। उनकी लंबी उँगलियों ने मेज़ पर पड़ी काली शीशम की छड़ी को फिर से उठा लिया। छ"ड़ी की नोक हवा में हल्के से घूमी, फिर सृष्टि की तरफ़ इशारा करती हुई रुक गई।

“स्क'र्ट उठाओ,” उनकी आवाज़ कमरे में गूँजी—भारी, कड़क और हुक्म से भरी। “और मेरे डेस्क पर… दोनों पाँ'व फै"लाकर बैठ जाओ।”

सृष्टि की साँस एक पल के लिए अटक गई। उसकी आँखों में शरारत और उत्ते'जना की मिली-जुली चमक थी। उसने धीरे-धीरे दोनों हाथ नीचे किए और स्कर्ट के किनारे को पकड़ लिया। कपड़ा सरकता गया—पहले जाँ'घों के ऊपर, फिर और ऊँचा—जब तक कि सफ़ेद लेस वाली पैं"टी साफ़ न दिखने लगी।

वह डेस्क पर सरककर बैठ गई। ठंडी लकड़ी उसकी नं"गी जाँ"घों के नीचे महसूस हुई। कुणाल की नज़रों के सामने उसने दोनों पाँ'व धीरे-धीरे चौड़े किए। घुटने अलग हो गए, जाँ'घें खुल गईं। कमरे की मद्धम रोशनी में उसकी खुली हुई पो'ज़ीशन और भी उ'द्दीपक लग रही थी।

कुणाल उसके सामने खड़े हो गए। उनकी 6 फ़ीट की काठी सृष्टि पर छा गई। छ'ड़ी की नोक उन्होंने सृष्टि की दाहिनी जाँ'घ के अंद'रूनी हिस्से पर रख दी—बिल्कुल हल्के से, जैसे छू रहे हों।

“इतना ही?” उन्होंने पूछा। आवाज़ में हल्की सी तंज थी। “और फै"लाओ। मैं देखना चाहता हूँ कि मेरी शरारती लड़की सज़ा के लिए कितनी तैयार है।”

सृष्टि ने निचला होंठ दाँतों से दबाया और पाँ'व और चौड़े कर दिए। अब उसकी पैं'टी का मध्य भाग साफ़ दिखाई दे रहा था। कुणाल की आँखें वहीं रुक गईं। उन्होंने छ"ड़ी को धीरे-धीरे ऊपर सरकाया—जाँ'घ के नरम मां'स पर से होते हुए पैं'टी के किनारे तक।

“अच्छी लड़की,” उन्होंने कर्कश स्वर में कहा। “आज तुमने असाइनमेंट अधूरा छोड़ा था… तो सज़ा भी पूरी मिलेगी।”

छ'ड़ी की चपटी सतह अचानक सृष्टि की दाहिनी जाँ'घ पर सटीक चोट के साथ गिरी।

थप!

आवाज़ कमरे में गूँज उठी। सृष्टि की कमर हल्की-सी उठ गई। द'र्द की तीखी चुभन के साथ एक गरम लहर उसके शरीर में दौड़ गई।

“गिनो,” कुणाल ने आदेश दिया।

“एक…” सृष्टि की आवाज़ काँपती हुई निकली, लेकिन उसने आँखें नहीं फेरें।

दूसरी चो"ट बाईं जाँ'घ पर आई—थोड़ा और ज़ोरदार।

थप!

“दो…”

तीसरी चो"ट और ऊपर, लगभग पैं'टी के इलास्टिक के पास। इस बार सृष्टि की साँस ज़ोर से निकल गई। उसकी उँगलियाँ डेस्क की किनारे को कसकर पकड़ने लगीं। आँखें बंद हो गईं, लेकिन पाँ'व फैले ही रहे।

कुणाल झुके। उनकी गर्म साँसें सृष्टि के कान और गर्दन पर पड़ने लगीं। छड़ी अब  उन्होंने उसे एक तरफ़ मेज़ पर रख दिया। दोनों हाथों से उन्होंने सृष्टि की स्कर्ट को और ऊपर खींच लिया, फिर उसकी पैं'टी के इलास्टिक पर उँगलियाँ फेर दीं।

“अब बताऊ…” उन्होंने धीमी, भारी आवाज़ में कहा, “इसे मैं हटाऊँ… या तुम खुद हटाकर मुझे दिखाओ कि तुम कितनी गीली हो चुकी हो मेरी सज़ा से?”

सृष्टि की आँखें खुल गईं। उनमें शरारत के साथ-साथ एक गहरी लालसा तैर रही थी। उसने धीरे से जवाब दिया—

“आप हटा दीजिए… डैडी। मैं आपकी हूँ।”

कुणाल की उँगलियाँ सृष्टि की पैं'टी के इलास्टिक पर रुकी हुई थीं। उन्होंने उसकी आँखों में देखा—एक पल के लिए—फिर दोनों अँगूठों से इलास्टिक को पकड़कर धीरे-धीरे नीचे खींचने लगे।

सफ़ेद लेस वाली पैं'टी उसकी जाँ'घों पर सरकती हुई नीचे आई। सृष्टि ने अपने पाँव थोड़े और ऊपर उठाए ताकि कपड़ा आसानी से निकल जाए। कुणाल ने पैं'टी को उसके टखनों तक उतारकर एक तरफ़ फेंक दिया।

अब सृष्टि पूरी तरह खुली हुई थी। डेस्क पर फैली जाँ'घों के बीच उसकी चिकनी, मुलायम त्वचा और गी"ली हो चुकी  साफ़ दिख रही थी। कुणाल की आँखें वहीं ठहर गईं। उनकी साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं।

“देखो…” उन्होंने धीमी, कर्कश आवाज़ में कहा। एक उँगली से उन्होंने सृष्टि की भीतरी जाँ'घ पर हल्के से स्पर्श किया, फिर धीरे-धीरे ऊपर सरकाते हुए उसके गीले होंठों तक पहुँचे। “इतनी गी'ली… सिर्फ़ कुछ थप्प"ड़ों से?”

सृष्टि की कमर हल्की-सी काँप उठी। कुणाल की उँगली उसके गीलेपन पर फिसल रही थी—धीरे-धीरे, जानबूझकर। उन्होंने उसकी क्लि'ट पर हल्का दबाव डाला, फिर दो उँगलियों से उसके गी'ले होंठों को अलग करते हुए अंदर की गर्माहट महसूस की।

“आह… डैडी…” सृष्टि की आवाज़ टूटती हुई निकली। उसकी कमर अपने-आप कुणाल की उँगलियों की तरफ़ उठने लगी।

कुणाल ने दूसरी उँगली भी अंदर धकेल दी। दोनों उँगलियाँ धीरे-धीरे अंदर-बाहर होने लगीं—गहरी, नियंत्रित गति में। उनके अंगूठे ने बाहर से उसकी संवे'दनशील गां'ठ को गोलाकार सहलाना शुरू कर दिया।

“इतनी जल्दी काँपने लगी?” उन्होंने उसके कान के पास झुककर कहा। उनकी गर्म साँसें सृष्टि की गर्दन पर पड़ रही थीं। “अभी तो मैंने सिर्फ़ उँगलियाँ दी हैं… छ"ड़ी अभी बाकी है।”

उन्होंने उँगलियों की गति थोड़ी तेज़ कर दी। सृष्टि की जाँ'घें काँपने लगीं। उसकी साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं। डेस्क पर उसकी पीठ थोड़ी-थोड़ी उठ रही थी।

कुणाल ने अचानक उँगलियाँ निकाल लीं। सृष्टि की आँखें शिकायत भरी खुल गईं, लेकिन कुणाल मुस्कुराए—वही कातिलाना मुस्कान।

उन्होंने फिर से छ"ड़ी उठाई। इस बार उसकी नोक को सृष्टि की खुली हुई pu"&&y के ठीक ऊपर रखा—छुआ नहीं, बस इतना पास कि सृष्टि को ठंडी लकड़ी की मौजूदगी महसूस हो।

“अब बताऊ,” कुणाल ने कहा। “अगली सज़ा कहाँ लेना चाहती हो… जाँघों पर… या यहाँ?”

छड़ी की नोक ने हल्के से उसकी गीली त्वचा को छुआ।

सृष्टि की साँस अटक गई। उसकी आँखों में डर और इच्छा दोनों थे। उसने फुसफुसाते हुए जवाब

दिया—

“जहाँ आप चाहें… डैडी। मैं आपकी सज़ा लेने के लिए तैयार हूँ।”

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Sakuntala Koiry

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"By day, I crunch numbers. By night, I craft darkness. Meet Sakuntala Koiry , teacher, and dark romance author, where shadows meet seduction." Meri stories meri khud ki likhi hui hai please ise koi copy na kare..

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