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My professor is my sugar daddy

अगली सुबह रॉयल एम्पायर यूनिवर्सिटी का ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट किसी खौफनाक छावनी से कम नहीं लग रहा था। ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट के हेड, प्रोफ़ेसर कुणाल मल्होत्रा के गुस्से की आग पूरे कैंपस में इस तरह फैली थी कि किसी की भी साँस लेने की हिम्मत नहीं हो रही थी।

  दो  स्टूडेंट्स—राहुल और अमन—की जो फ़र्ज़ी अटेंडेंस रिपोर्ट पकड़ी गई थी, उस पर कुणाल का रूप किसी यमराज जैसा भयानक हो चुका था।

क्लासरूम के अंदर सन्नाटा ऐसा था कि सुई गिरने की भी आवाज़ सुनाई दे जाए। बोर्ड पर अपनी काली छड़ी को इतनी ज़ोर से पटका गया कि उसकी आवाज़ से पूरी क्लास का कलेजा कांप उठा। कुणाल की आँखें अंगारे की तरह लाल थीं, गले की नसें तनी हुई थीं और उनकी भारी, गड़गड़ाती आवाज़ पूरे हॉल में गूँज उठी—

"फर्जी अटेंडेंस और कागज़ों की हेराफेरी?! यूनिवर्सिटी के नियमों को अपनी बपौती समझ रखा है तुम दोनों ने?" कुणाल ने राहुल और अमन के ठीक सामने जाकर दहाड़ लगाई। " तुम्हारी इतनी औकात कैसे हुई कि तुम मेरी पीठ पीछे मेरे ही डिपार्टमेंट में यह घटिया मक्कारी करो? निकलो मेरी क्लास से! ऑन द स्पॉट, इसी सेकण्ड इस यूनिवर्सिटी से बाहर का रास्ता नापो तुम दोनों! आज के बाद अगर कैंपस की सीमा के अंदर तुम्हारी परछाई भी दिख गई, तो कॉलेज प्रशासन से कहकर तुम्हारा पूरा करियर बर्बाद कर दूंगा! दफा हो जाओ मेरी नज़रों के सामने से!"

कुणाल के इस खौफनाक और जानलेवा तेवर को देखकर राहुल और अमन का खून सूख चुका था। वे बिना एक शब्द बोले, रोते-बिलखते हुए तुरंत क्लास से बाहर भाग गए। क्लास में बैठा हर एक स्टूडेंट अपनी बेंच पर सहमा हुआ था, किसी की भी गर्दन हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी।

पूरी यूनिवर्सिटी इस बात से बेखबर थी कि इस खूंखार और बेरहम प्रोफ़ेसर के दिल के किसी कोने में कोई ऐसा कमज़ोर और महफूज कोना भी था, जिससे पूरी दुनिया अनजान थी—और वो कोना सिर्फ़ एक नाम था, सृष्टि शर्मा।

आज सृष्टि ने एक बेहद आकर्षक और स्टाइलिश काले रंग की कॉटन शर्ट, घुटनों से पार तक जाती हुई लंबी स्कर्ट और घुटनों तक चढ़े हुए लंबे मोज़े (socks) पहने हुए थे, जिसमें उसकी मासूमियत और नटखट अदा का अनूठा मेल दिख रहा था।

कुणाल ने अपनी छड़ी को मेज़ पर पटका और अपनी लाल आँखों को घुमाते हुए पूरी क्लास पर एक खौफनाक नज़र डाली, "कॉपी-किताबें बंद करो! आज सरप्राइज क्लास टेस्ट होगा! ज़ूलॉजी के मेकैनिज्म्स पर पूरा पेपर है। अगर किसी की नज़र भी अपनी कॉपी के अलावा इधर-उधर भटकी, या किसी ने चीटिंग करने की जरा सी भी हिमाकत की... तो राहुल और अमन की तरह उसे भी बिना एक पल गंवाए इसी वक्त कॉलेज से बाहर फेंक दूंगा!"

क्लास में एक बार फिर सिहरन दौड़ गई। सबने तुरंत अपने पन्ने खींचे और सिर झुकाकर लिखने में जुट गए। कोई अपनी पलकें तक नहीं झपका रहा था, क्योंकि कुणाल की तीखी और बाज़ जैसी नज़रें हर बेंच पर टिकी हुई थीं।

सृष्टि भी पूरी शिद्दत से अपना पेपर लिखने लगी। वह बड़े ध्यान से सवालों के जवाब दे रही थी, लेकिन तभी 'स्नेक बाइटिंग मेकैनिज्म' (सर्प दंश प्रक्रिया) वाले सवाल पर आकर वह थोड़ा सा उलझन में पड़ गई। वेनम ग्लैंड्स और फैंग्स के मूवमेंट का पॉइंट उसके दिमाग से स्लिप हो गया। उलझन के मारे सृष्टि ने अपने पेन का पिछला हिस्सा अपने गुलाबी होंठों के बीच दबा लिया और बड़ी-बड़ी मासूम आँखों से छत की तरफ़ देखते हुए सोचने लगी।

तभी उसकी नज़रें उठीं और सामने पोडियम के पास खड़े प्रोफ़ेसर कुणाल से जा मिल गईं।

कुणाल की गहरी, भूरी आँखें लगातार सिर्फ़ और सिर्फ़ सृष्टि पर ही टिकी हुई थीं। पूरी क्लास में जहाँ सब खौफ के साये में कांप रहे थे, वहीं कुणाल की निगाहें अपनी महबूबा की हर नादान हरकत को बड़े गौर से निहार रही थीं।

सृष्टि ने थोड़ी सी ढीठियत दिखाते हुए, बिना आवाज़ के अपने होंठ हिलाए—"प्रोफ़ेसर... मुझे यहाँ एक पॉइंट समझ नहीं आ रहा, ज़रा देख लीजिए ना..."

यह नज़ारा देखते ही क्लास के बाकी स्टूडेंट्स की साँसें हलक में अटक गईं। सबकी आँखें फटी की फटी रह गईं। हे भगवान! इस लड़की का भेजा सनक गया है क्या? खूंखार प्रोफ़ेसर मल्होत्रा, जो अभी-अभी दो लड़कों को ऑन द स्पॉट रस्टिकेट करके निकाल चुके हैं, उनकी क्लास में यह लड़की सीधे उनसे मदद माँग रही है? आज तो प्रोफ़ेसर इसे भी ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे! सबने मन ही मन मान लिया कि आज सृष्टि की शामत आ गई है।

लेकिन अगले ही पल जो हुआ, उसने पूरी क्लास को सन्न कर दिया।

कुणाल ने अपनी सख्त और भारी चाल से चलना शुरू किया। उनके जूतों की 'थप-थप' आवाज़ पूरे हॉल में गूँजती हुई आख़िरी बेंच के पास पहुँची, जहाँ सृष्टि बैठी थी। कुणाल सीधे सृष्टि की डेस्क के पास आकर खड़े हो गए। उन्होंने अपनी शीशम की छड़ी को साइड में रखा और थोड़ा झुककर उसकी कॉपी पर नज़र डाली।

"कहाँ अटकी हो, मिस शर्मा?" कुणाल की आवाज़ भारी और गंभीर थी, लेकिन उसमें बाहर वालों के लिए जो ज़हर और गुस्सा था, वो सृष्टि के करीब आते ही एक गहरी, मदहोश करने वाली नरमी में बदल चुका था।

सृष्टि ने मासूमियत से अपनी पलकें झपकाईं और अपनी शर्ट के कॉलर को थोड़ा ठीक करते हुए फुसफुसा कर बोली, "सर... वो स्नेक बाइटिंग मेकैनिज्म में मसल्स का प्रेशर वाला स्टेप भूल गई थी..."

कुणाल ने बिल्कुल आराम से, बिना किसी को भनक लगे, अपनी उंगली से उसके पेपर के मार्जिन पर पॉइंट करते हुए कहा, "व्ॉमल कैविटी का मस्कुलर प्रेशर जब डक्ट्स पर पड़ता है, तब फैंग्स इरेक्ट होते हैं... समझ आया?"

कुणाल का इस तरह करीब आना, उनकी साँसों की गर्म आहट और उनका यह व्यक्तिगत दुलार सिर्फ सृष्टि के लिए था। कुणाल ने प्यार से उसकी पीठ पर एक हल्की सी थपकी दी और कड़क आवाज़ में बोले, "चलो, अब चुपचाप अपना पेपर पूरा करो।"

सृष्टि के चेहरे पर एक प्यारी सी खिलखिलाती मुस्कान आ गई। उसने तुरंत अपना पेन उठाया और बिना किसी रुकावट के फटाफट पूरा जवाब लिख डाला।

लेकिन यह सारा ड्रामा क्लास में बैठी कुछ लड़कियों की आँखों में खटक रहा था। क्लास की दो अमीर और बिगड़ैल लड़कियां—रिया और तान्या—दूर से यह सब देख रही थीं। उनके चेहरे पर ईर्ष्या और गुस्से के मारे पसीना छूट रहा था।

रिया ने अपनी सहेली के कान में जलते हुए कहा, "देख रही है तान्या? कल से नोटिस कर रही हूँ, जब देखो तब प्रोफ़ेसर मल्होत्रा इसी लड़की पर मेहरबान रहते हैं! हम लोग ज़रा सी साँस भी लें तो बाहर निकाल देते हैं, और इस सृष्टि को ऐसे प्यार से समझा रहे हैं जैसे कोई रानी बैठी हो! दाल में कुछ तो काला है!"

तान्या ने गुस्से से अपनी पेन को ज़मीन पर दबाते हुए दाँत पीसकर कहा, "पता नहीं इस लड़की ने प्रोफ़ेसर पर कौन सा काला जादू कर रखा है! कल को मैं सीधे ट्रस्टी से शिकायत करूँगी कि प्रोफ़ेसर मल्होत्रा क्लास में पक्षपात कर रहे हैं!"

लेकिन रिया और तान्या की इन जलने वाली बातों से सृष्टि को घंटा फर्क नहीं पड़ता था। वह जानती थी कि बाहर वाले चाहे जितना ज़हर उगल लें, इस खूंखार शेर को सिर्फ उसकी बाहों में आकर शांत होना आता है।

टेस्ट का वक़्त खत्म हुआ और कुणाल ने कड़क आवाज़ में पेपर सबमिट करने का आदेश दिया। क्लास खत्म हुई और कुणाल अपनी छड़ी उठाकर केबिन की तरफ़ बढ़ गए, जाते-जाते उनकी आँखों का एक गहरा इशारा सिर्फ सृष्टि के नाम था।

 

सृष्टि  अपनी किताब समेट कर जैसे ही कॉरिडोर में निकली, तभी रास्ते में रिया और तान्या ने आकर उसका रास्ता रोक लिया। दोनों के चेहरे पर गुस्सा और ईर्ष्या साफ झलक रही थी।

रिया ने आगे बढ़कर तंज कसते हुए कहा, "ओह... तो मिस सृष्टि शर्मा! आज क्लास में प्रोफ़ेसर मल्होत्रा से पर्सनल कोचिंग बहुत अच्छे से मिल गई होगी, है ना?"

तान्या ने हाथ बांधते हुए ज़हर उगलते हुए कहा, "अरे रिया, तू इन जैसी चापलूस लड़कियों से क्या पूछ रही है! पूरी यूनिवर्सिटी जानती है कि प्रोफ़ेसर साहब आज तक किसी की तरफ़ आँख उठाकर नहीं देखे, पर मैडम के लिए तो खुद प्रोफ़ेसर साहब पोडियम छोड़कर बेंच तक आ गए थे! कोई जादू-टोना कर रखा है या शार्टकट का कोई और तरीका है?"

सृष्टि ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें घुमाईं, अपने बालों को पीछे किया और एक बेहद ठंडी और आत्मविश्वास से भरी मुस्कान के साथ बोली, "देख Riya और Tanya, अपनी बकवास अपने पास रखो। अगर तुम्हारी अकल घास चरने गई है , तो इसमें मेरा क्या कसूर? पढ़ाई करो, दूसरों पर जलने से मार्क्स नहीं बढ़ते!"

"ज़्यादा ज़बान मत चलाओ!" रिया गुस्से से लाल होते हुए सृष्टि के करीब आ गई। "कल को हम सीधे  ट्रस्टी के सामने यह मुद्दा उठाएंगी कि प्रोफ़ेसर मल्होत्रा क्लास में साफ़-साफ पक्षपात कर रहे हैं और तुम्हें स्पेशल फेवर दे रहे हैं!"

"अच्छा? तो जाकर शिकायत कर दो ना, किसने रोका है?" सृष्टि ने ढीठई से अपनी स्कर्ट का कॉर्नर ठीक करते हुए कहा। "जो उखाड़ना है उखाड़ लो, मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं तुम दोनों!"

गुस्से में आकर तान्या ने सृष्टि का कंधा जोर से धक्का दे दिया, "बहुत घमंड आ गया है तुझे! रुक अभी बताती हूँ..."

सृष्टि भी पीछे हटने वालों में से नहीं थी। उसने भी तान्या का हाथ झटकते हुए धक्का दे दिया और दोनों के बीच कॉरिडोर के बीचों-बीच हाथापाई और बाल खींचने वाली भयानक लड़ाई शुरू हो गई। आसपास खड़े बाकी स्टूडेंट्स डर के मारे पीछे हट गए और तमाशा देखने लगे।

कोई भी बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, क्योंकि मामला प्रोफ़ेसर कुणाल मल्होत्रा के डिपार्टमेंट का था।

तभी कॉरिडोर के स्पीकर में और डिपार्टमेंट के चपरासी की कड़क आवाज़ गूँजी—

"मिस सृष्टि शर्मा, मिस रिया, और मिस तान्या... तीनों अभी के अभी प्रोफ़ेसर कुणाल मल्होत्रा के प्राइवेट केबिन में पेश हों! हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट का सख्त हुक्म है!"

यह सुनते ही रिया और तान्या के चेहरे का रंग उड़ गया। उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

रिया ने घबराते हुए कहा, "हे भगवान! लगता है कॉरिडोर में हमारी लड़ाई किसी ने देख ली और सर तक बात पहुँच गई! आज तो सर हम दोनों को भी ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे!"

तान्या का भी कांपते हुए बुरा हाल था, "अगर सर ने गुस्से में हमें भी रस्टिकेट कर दिया तो हमारी डिग्री का क्या होगा?"

लेकिन इसके उलट, सृष्टि के चेहरे पर ज़रा सा भी डर नहीं था। उसके होंठों पर वही नटखट और शरारती मुस्कान तैर रही थी। वह मन ही मन जानती थी कि इस बुलावेल के पीछे की असली वजह क्या है।

तीनों लड़कियाँ लड़खड़ाते कदमों से चलती हुई प्रोफ़ेसर कुणाल मल्होत्रा के केबिन के बाहर आकर रुक गईं। रिया ने काँपते हुए हाथों से दरवाज़े पर दस्तक दी।

"कम इन," अंदर से कुणाल की वह भारी, खौफनाक और गड़गड़ाती आवाज़ आई, जिसे सुनते ही अच्छे-अच्छे की रूह काँप जाती थी।

सृष्टि ने सबसे आगे बढ़कर केबिन का दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रख दि

या। रिया और तान्या भी सहमी हुई पीछे-पीछे अंदर दाखिल हुईं। केबिन के अंदर का तापमान और वहाँ बैठे कुणाल के तेवर देखकर तीनों की साँसें अटक गईं।

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Sakuntala Koiry

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"By day, I crunch numbers. By night, I craft darkness. Meet Sakuntala Koiry , teacher, and dark romance author, where shadows meet seduction." Meri stories meri khud ki likhi hui hai please ise koi copy na kare..

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