केबिन के अंदर का नज़ारा किसी खौफनाक तूफान जैसा था। प्रोफ़ेसर कुणाल मल्होत्रा अपनी बड़ी लेदर की कुर्सी पर पूरी अकड़ और सख्ती के साथ बैठे हुए थे। उनके चेहरे पर किसी भी तरह की नरमी का नामो-निशान तक नहीं था; बल्कि उनकी आँखें अंगारे की तरह दहक रही थीं और हाथ में उनकी वही शीशम की काली छड़ी थी, जिसे वे बार-बार अपनी मेज़ पर हल्के से पटक रहे थे।
थप... थप... थप...
छड़ी की वह आवाज़ छोटे से केबिन में गूँजती हुई सीधे तीनों लड़कियों के दिल पर हथौड़े की तरह पड़ रही थी।
रिया और तान्या के पैर डर के मारे आपस में कांप रहे थे। उन्होंने तुरंत अपनी नज़रें ज़मीन पर गड़ा लीं। इसके उलट, सृष्टि थोड़ी बेपरवाह सी खड़ी थी। उसे लगा था कि हमेशा की तरह केबिन का दरवाज़ा बंद होते ही उसके 'शुगर डैडी' उसे प्यार से गले लगा लेंगे और रिया-तान्या को डाँटकर भगा देंगे।
कुणाल ने अपनी कुर्सी से उठकर अपनी 6 फीट से लंबी काठी के साथ आगे कदम बढ़ाया। उनकी भारी जूतों की आवाज़ ने कमरे के सन्नाटे को और गहरा कर दिया।
वे सीधे तीनों के सामने आकर खड़े हो गए। उनकी लंबी और रौबदार परछाई तीनों पर पड़ रही थी।
"डिपार्टमेंट में यह तमाशा क्या लगा रखा है तुम तीनों ने? तुम तीनों ने इस ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट को कोई मछली बाज़ार समझ रखा है क्या?!" कुणाल की भारी, गड़गड़ाती और खौफनाक आवाज़ पूरे केबिन में गूँज उठी। "कॉरिडोर में बाल खींचकर लड़ना, चिल्लाना—यूनिवर्सिटी की मर्यादा की धज्जियाँ उड़ाना चाहते हो तुम लोग? हाँ? रिया, तान्या... पहले तुम दोनों बोलो, लड़ाई की असल वजह क्या थी?"
रिया ने काँपते हुए, रोनी सूरत में कहा, "स...सर... गलती हमारी नहीं है... वो... वो सृष्टि क्लास में आपसे बार-बार स्पेशल फेवर ले रही थी, सबके सामने आपने उसे आकर सवाल समझाया, इसलिए... इसलिए हमने गुस्से में आकर..."
रिया की बात पूरी होने से पहले ही कुणाल की आँखें गुस्से से लाल हो गईं। उन्होंने अपनी छड़ी को ज़ोर से ज़मीन पर दे मारा—धड़!
"बकवास बंद करो अपनी!" कुणाल दहाड़े। "तुम्हारी इतनी बड़ी घटिया गलतफ़हमी कैसे हो गई कि मैं इस डिपार्टमेंट में किसी भी स्टूडेंट के साथ पक्षपात कर रहा हूँ? एक प्रोफ़ेसर के तौर पर मेरी नज़र में क्लास का हर स्टूडेंट बराबर है! अगर मैंने क्लास में किसी को कोई मेकैनिज्म समझाया, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मैं किसी को स्पेशल ट्रीटमेंट दे रहा हूँ! अपनी इस गंदी सोच और जलन को अपने तक ही रखो, वरना इसी वक्त दोनों को कॉलेज से बाहर का रास्ता दिखा दूंगा!"
रिया और तान्या का खून सूख चुका था। वे थर-थर काँपते हुए ज़मीन पर नज़रें टिकाए खड़ी रहीं।
इसके बाद कुणाल ने अपनी सख्त और भयानक नज़रें सृष्टि की तरफ़ घुमाईं। वे अपनी भारी चाल से चलते हुए सृष्टि के करीब पहुँचे। सृष्टि को पूरा भरोसा था कि कुणाल सिर्फ नाटक कर रहे हैं, लेकिन कुणाल के तेवर देखकर उसकी भी साँसें अटक गईं।
कुणाल ने सृष्टि ko बेहद सख्त और कड़क आवाज़ में डाँटना शुरू किया—
"और तुम, मिस सृष्टि शर्मा! तुम्हें क्या लगता है? तुम क्लास में सवाल पूछने के नाम पर अनुशासन तोड़ोगी और अपनी हरकतों से दूसरों को उकसाओगी?" कुणाल की आवाज़ में ऐसा कड़ापन था, जो उन्होंने आज तक सृष्टि के सामने कभी नहीं दिखाया था। "तुम्हें क्लास में एक बार सवाल समझा दिया, तो इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं है कि तुम अपने आप को बाकी स्टूडेंट्स से ज़्यादा काबिल या ख़ास समझने लगोगी! अगर अगली बार तुम्हारी तरफ़ से ज़रा सी भी अनुशासनहीनता दिखाई दी, तो मैं यह भूल जाऊँगा कि तुम कौन हो... सीधे यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक सज़ा मिलेगी!"
सृष्टि का दिल ज़ोर से धड़क उठा। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह सन्न होकर कुणाल को देखने लगी—हे भगवान! ये वही कुणाल हैं जो कल रात तक उसे अपनी बाहों में भरकर प्यार कर रहे थे, और आज सबके सामने उसे इतनी खरी-खोटी सुना रहे हैं? कुणाल के इस कड़े और बेरहम रूप ने सृष्टि को अंदर तक हिला दिया था। उसकी आँखों में बेबसी और हल्के से आँसू तैरने लगे।
कुणाल ने अपनी आँखें फेर लीं—वे खुद अंदर से तड़प रहे थे सृष्टि के चेहरे पर आँसू देखकर, लेकिन किसी को उन दोनों के रिश्ते पर शक न हो, इसलिए यह नाटक ज़रूरी था।
कुणाल ने अपनी छड़ी मेज़ पर पटकी और हुक्म दिया, "दफा हो जाओ तीनों मेरी नज़रों के सामने से! रिया और तान्या, लाइब्रेरी की सारी पुरानी फाइल्स साफ करके कल तक मेरे डेस्क पर पहुँचाओगी, और सृष्टि... तुम सीधे अपनी क्लास में जाओगी! निकलो यहाँ से अभी!"
केबिन का दरवाज़ा बंद होते ही तीनों लड़कियाँ बाहर कॉरिडोर में आ गईं।
रिया और तान्या अपनी जान बच जाने पर राहत की गहरी साँस ले रही थीं। दोनों तुरंत लाइब्रेरी की तरफ़ भाग खड़ी हुईं। रास्ते में रिया ने अपना दिल संभालते हुए कहा, "हे भगवान! लाख-लाख शुक्र है कि सर ने हमें रस्टिकेट नहीं किया! यार, हम तो खामखां जो-तो सोच रहे थे कि सर सृष्टि का फेवर करते हैं। देखा ना, सर ने तो हम दोनों के साथ-साथ उसे भी कितने बुरे तरीके से डांटा! हमारे सामने ही उसकी बैंड बजा दी!"
तान्या ने भी हाँफते हुए कहा, "हाँ यार, सच में! प्रोफ़ेसर मल्होत्रा तो सच में किसी का सगा नहीं हैं। अच्छा हुआ सर ने हमें माफ़ कर दिया, अब चुपचाप चलकर लाइब्रेरी की फाइल्स सेट करते हैं।"
उधर दूसरी तरफ़, सृष्टि भारी कदमों से अपनी क्लासरूम की तरफ़ बढ़ रही थी। लेकिन उसका दिल और दिमाग इस बात को हज़म करने को बिल्कुल तैयार नहीं था कि उसके 'डैडी' ने सबके सामने उसे इतनी तेज़ डाँट पिलाई कैसे! उसकी ईगो और नटखटपन जाग उठा था।
"ऐसे कैसे डांट दिया मुझे? पूरे डिपार्टमेंट के सामने मेरी क्लास लगा दी!" सृष्टि ने अपने पैर पटके, अपनी स्कर्ट को थोड़ा सा झटका और अचानक क्लासरूम का रास्ता छोड़कर वापस प्रोफ़ेसर मल्होत्रा के केबिन की तरफ़ मुड़ गई।
बिना एक पल गँवाए, बिना कोई दस्तक (knock) दिए, सृष्टि ने केबिन का भारी दरवाज़ा धकेला और सीधे अंदर घुस गई।
अंदर कुणाल अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर बैठे हुए एक ज़रूरी फाइल देख रहे थे। बिना नॉक किए दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनकर उन्होंने सिर उठाया। सृष्टि को गुस्से से लाल चेहरा लिए अंदर आते देख वे तुरंत समझ गए कि उनकी नटखट प्रेमिका का पारा इस वक़्त सातवें आसमान पर है।
कुणाल ने फाइल को थोड़ा साइड में किया और शांत लेकिन संजीदा आवाज़ में बोले, "बच्चे, अभी नहीं... मैं अभी बहुत बिज़ी हूँ। तुम अपनी क्लास में जाओ।"
लेकिन सृष्टि ने उनकी एक न सुनी। उसने कुणाल की बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया। वह इठलाती और अपने पैर पटकती हुई सीधे उनकी मेज़ के पास पहुँची और एक ही झटके में कुणाल की गोद में जाकर बैठ गई!
सृष्टि ने अपनी दोनों बाहें कुणाल की गर्दन में डालीं, अपने गुलाबी होंठों का एक बड़ा सा पाउट (pout) बनाया और बच्चों की तरह शिकायत करते हुए बोली, "आपने मुझे डांटा डैडी! उन दो घटिया लड़कियों के सामने आपने मुझे इतना ज़ोर से डांटा! उन्हें शक हो गया था तो क्या हुआ, आप मुझे इतने कड़े टोन में कैसे बोल सकते हैं?"
कुणाल ने उसकी पतली कमर पर हाथ टिकाया और अपनी गंभीर मुस्कान दबाते हुए बोले, "अरे, पर मैंने तो सिर्फ़..."
"नहीं! मुझे कुछ नहीं सुनना!" सृष्टि ने कुणाल की बात बीच में ही काट दी, उसका पाउट और ज़्यादा बढ़ गया। "आपने मुझे इतनी ज़ोर से डांटा, मेरी आँखों में आँसू आ गए थे! अब मैं आपसे बिल्कुल बात नहीं करूंगी, जब तक आप मुझे मनाएंगे नहीं!"
सृष्टि की इस क्यूट शिकायत और पाउट को देखकर कुणाल का सारा प्रोफ़ेसर वाला कड़कपन हवा में
उड़ गया। वे अपनी गोद में बैठी अपनी 20 साल की चुलबुली जान को देखकर अपनी हँसी रोक नहीं पाए।



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