कुणाल ने मुस्कुराते हुए अपनी बाहों का घेरा सृष्टि की पतली कमर पर और कस लिया। उन्होंने अपने एक हाथ की उंगलियों से सृष्टि के गालों पर बिखरी बालों की लटों को पीछे सरकाया और उसके होंठों के बने प्यारे से पाउट को निहारने लगे। जिस प्रोफ़ेसर के एक इशारे पर पूरा ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट थर-थर कांपता था, वही प्रोफ़ेसर इस वक़्त अपनी गोद में बैठी 20 साल की चुलबुली लड़की के सामने पूरी तरह हार चुका था।
"अरे मेरी ड्रामा क्वीन..." कुणाल ने अपनी भारी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा। उन्होंने झुककर सृष्टि के भीगे हुए गालों पर अपने होंठ टिका दिए। "अगर मैं वहाँ वो कड़क नाटक नहीं करता, तो वो दोनों बिगड़ैल लड़कियाँ सीधे ट्रस्टी के पास पहुँच जातीं। पूरे कॉलेज में यह अफ़वाह फैल जाती कि प्रोफ़ेसर मल्होत्रा अपनी एक ख़ास स्टूडेंट को फेवर दे रहे हैं। तुम्हें क्या लगता है, अपनी जान की आँखों में आँसू देखकर मेरा दिल नहीं तड़प रहा था?"
सृष्टि ने झटके से अपना मुँह दूसरी तरफ़ घुमा लिया और अपने नन्हें हाथों से कुणाल के कंधे पर एक हल्की सी चपत लगाई, "मुझे कुछ नहीं सुनना डैडी! आपने अपनी वो काली छड़ी मेज़ पर इतनी ज़ोर से पटकी कि मैं सच में सहम गई थी! और वो जिस टोन में आपने मुझसे कहा ना—'मिस सृष्टि शर्मा'... मुझे ज़रा भी अच्छा नहीं लगा! आप मुझे इतने रूखे तरीके से कैसे डांट सकते हैं?"
कुणाल ने उसके मासूम और नटखट चेहरे को अपने दोनों हाथों में थामा और उसकी बड़ी-बड़ी भूरी आँखों में झांका। उनकी आँखों में अब बाहर वाली कोई सख्ती नहीं थी, बल्कि सिर्फ़ बेइंतहा मोहब्बत और अपनापन झलक रहा था।
"अच्छा बाबा, आई एम सॉरी..." कुणाल ने बड़े प्यार से उसकी नाक को अपनी उंगलियों के बीच दबाया। "लेकिन मेरी बात भी सुनो। कॉरिडोर में उन दोनों से हाथ-पैर चलाने की क्या ज़रूरत थी? अगर धक्का-मुक्की में तुम्हें ज़रा सी भी चोट लग जाती, तो मैं उन दोनों का क्या हाल करता, जानती हो ना? मैंने तुम्हें नहीं, बल्कि उस स्थिति को संभाला है।"
सृष्टि का गुस्सा अब धीरे-धीरे पिघलने लगा था, लेकिन उसने अपनी ढीठई बरकरार रखी। उसने कुणाल के कोट के कॉलर से खेलते हुए आँखों को मटकाकर कहा, "तो वो दोनों आपके नाम पर बकवास कर रही थीं! कह रही थीं कि मैं आप पर जादू-टोना करके फेवर ले रही हूँ... मैं कैसे सुन लेती? लेकिन ऐसे सूखा-सूखा 'सॉरी' काम नहीं करेगा डैडी। मुझे प्रॉपर कॉम्पेनसेशन (हर्जाना) चाहिए!"
कुणाल के चेहरे पर एक दिलकश और शरारती मुस्कान बिखर गई। उन्होंने अपनी रिवॉल्विंग चेयर को थोड़ा और मेज़ के पास खिसकाया और सृष्टि को अपनी छाती से पूरी तरह से चिपका लिया।
"अच्छा? और मेरी मैडम को हर्जाने में क्या चाहिए, हम्म?" कुणाल ने उसके मखमली कॉटन शर्ट के कॉलर के पास अपनी उंगलियां फेरते हुए पूछा।
सृष्टि ने उनके गले में बाहें डालकर अपनी आँखें मटकाईं, "आज शाम को कॉलेज खत्म होने के बाद आप मुझे अपनी स्पोर्ट्स कार में लॉन्ग ड्राइव पर ले जाएंगे... और रास्ते में मेरी पसंदीदा ब्लैक करेंट आइसक्रीम भी खिलाएंगे! और हाँ, कार में आपको मुझे पूरे रास्ते 'मेरी जान' कहना पड़ेगा, मिस शर्मा नहीं!"
कुणाल उसकी इस बेतुकी और प्यारी शर्त पर दिल खोलकर हँस पड़े। उन्होंने सृष्टि के माथे पर एक गहरा और लंबा चुंबन लिया, जिससे सृष्टि की सारी नराजगी एक पल में हवा हो गई।
"तुम्हारी हर शर्त मंज़ूर है, मेरी जान..." कुणाल ने उसकी कमर में चुटकी काटते हुए कहा। "लेकिन अभी तुम्हें चुपचाप अपनी क्लास में जाना होगा, वरना अगर कोई और बिना नॉक किए अंदर आ गया, तो आज सच में पूरे डिपार्टमेंट में भूचाल आ जाएगा।"
सृष्टि ने कुणाल के गाल पर एक ज़ोरदार किस किया, उनकी गोद से छलांग लगाकर नीचे उतरी और अपनी स्कर्ट को सही करते हुए शरारत से बोली, "ठीक है डैडी... शाम को 5 बजे पार्किंग में इंतज़ार करुंगी, लेट मत होना!"
सृष्टि आँख मारकर मुस्कुराती हुई केबिन से बाहर निकल गई, और कुणाल अपनी कुर्सी पर टेक लगाकर सिर्फ अपनी इस नटखट महबूबा को जाता हुआ देखते रह गए।
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शाम के ठीक पाँच बजते ही कुणाल अपनी चमचमाती काली स्पोर्ट्स कार लेकर यूनिवर्सिटी की सुनसान पार्किंग में सृष्टि का इंतज़ार कर रहे थे। जैसे ही सृष्टि अपनी ब्लैक कॉटन शर्ट, घुटनों से पार जाती ग्रे स्कर्ट और घुटनों तक चढ़े सॉक्स को संभालती हुई नटखट अंदाज़ में कार की तरफ़ बढ़ी, उसकी आँखों में एक अजीब सी शैतानी चमक थी।
कार में बैठते ही सीटबेल लगाने के बहाने उसने कुणाल के शर्ट का कॉलर अपनी तरफ़ खींचा और उनके गाल पर एक हल्का सा काट लिया।
"चलो डैडी... मेरी आइसक्रीम का टाइम हो गया है!" सृष्टि ने मुस्कुराते हुए अपना हुक्म चलाया।
कुणाल ने हल्की मुस्कान के साथ कार को हाईवे की तरफ़ बढ़ा दिया। शहर से दूर एक शांत मोड़ पर बने पार्लर से कुणाल ने उसकी पसंदीदा ब्लैक करेंट आइसक्रीम दिलाई।
कार में वापस आकर सृष्टि बड़े चाव से आइसक्रीम खाने लगी। पहला ही चम्मच मुँह में लेते ही थोड़ी सी डार्क पर्पल आइसक्रीम उसके गुलाबी होंठों पर लग गई। इससे पहले कि सृष्टि उसे पोंछ पाती, कुणाल बिना एक शब्द कहे खुद उसकी तरफ़ झुके और अपने होंठों से उसके होंठों पर लगी आइसक्रीम को धीरे से चूमते हुए साफ़ कर दिया।
कुणाल के इस अचानक और प्यार भरे छुअन से सृष्टि के दिल में शरारत का कीड़ा जाग उठा। उसने जानबूझकर फिर से थोड़ा सा आइसक्रीम का हिस्सा अपने ऊपरी होंठ पर लगा लिया और मासूमियत से कुणाल को देखने लगी।
कुणाल ने उसके चेहरे की यह चालाकी ताड़ ली; वे मुस्कुराए और दोबारा अपने होंठों की मिठास से उसके होंठों पर फैली आइसक्रीम को चूसकर साफ़ कर दिया।
अब सृष्टि का नटखटपन और बढ़ गया। इस बार उसने जानबूझकर आइसक्रीम की एक बूंद अपनी ठोड़ी (chin) पर गिरा ली। कुणाल ने एक हल्की सी आह भरी, अपनी उंगलियों से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाया और धीरे-धीरे अपने होंठों से वहाँ जमी ठंडी आइसक्रीम को साफ़ किया, जिससे सृष्टि के मुँह से एक मखमली सिसकारी निकल गई।
खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। सृष्टि ने एक बड़ा चम्मच उठाया और बेहद बेबाक अदा से आइसक्रीम की दो बूंदें अपनी मखमली गर्दन से खिसकाते हुए ब्लैक कॉटन शर्ट के खुले कॉलर के पास यानी अपने क्ली'वेज पर गिरा लीं।
"ओह हो डैडी... अब तो आइसक्रीम यहाँ भी गिर गई!" सृष्टि ने अपनी पलकें मटकाते हुए एक बड़ा सा पाउट बनाया।
कुणाल की भूरी आँखों में जूनून की आग भड़क उठी। उनकी साँसें भारी हो गईं। वे पूरी तरह सृष्टि के ऊपर झुके और अपनी ज़बान और होंठों की गर्मी से उसकी गर्दन और क्ली'वेज पर बिखरी हर एक बूंद को बेहद शिद्दत से साफ़ करने लगे। सृष्टि की उंगलियाँ खुद-ब-खुद कुणाल के बालों में उलझ गईं।
इसके बाद जब कुणाल ने कार को वापस 120 की स्पीड पर हाईवे पर दौड़ाया, तो सृष्टि की शैतानी दूसरे लेवल पर पहुँच गई। उसने अपनी लंबी-सुडौल टांगों को उठाकर सीधे स्टीयरिंग व्हील और डैशबोर्ड के पास टिका दिया।
उसके घुटनों तक चढ़े मोज़े और ऊपर खिसकी स्कर्ट कुणाल की नज़रों को भटकाने के लिए काफ़ी थी।
"सृष्टि... सीधे बैठो, मैं 120 की स्पीड पर ड्राइव कर रहा हूँ! एक्सीडेंट हो जाएगा!" कुणाल ने भारी आवाज़ में कड़ापन लाने की कोशिश करते हुए चेतावनी दी।
लेकिन सृष्टि ने उनकी चेतावनी को अनसुना कर दिया। उसने अपने एक नं'गे पैर की उंगलियों को कुणाल की जांघ से खिसकाते हुए सीधे उनके पैं'ट के ऊपर उनके प्राइ'वेट पार्ट पर रख दिया। सृष्टि ने बिना किसी झिझक के कपड़े के ऊपर से ही दबाव बनाकर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया।
"क्यों डैडी? इतने खूंखार प्रोफ़ेसर साहब अपनी छोटी सी स्टूडेंट के ट'च से घबरा गए?" सृष्टि ने चिढ़ाते हुए अपनी हरकत जारी रखी।
कुणाल के हाथ स्टीयरिंग पर कस गए, उनकी साँसें भारी हो गईं और गले से एक गहरी कराह निकल आई। अब कुणाल के सब्र का बाँध पूरी तरह टूट चुका था। उन्होंने एक झटके में कार को हाईवे के किनारे घने पेड़ों के सन्नाटे में रोक दिया।
झटके से कार रुकी, इंजन बंद हुआ और पूरे केबिन में सिर्फ़ दोनों की तेज़ होती साँसों की आवाज़ गूँजने लगी। कुणाल ने अपनी सीटबेल खोली और एक ही झटके में झुककर सृष्टि की दोनों कलाइयों को उसके सिर के ऊपर लेदर सीट पर दबोच लिया। उनकी लाल होती आँखें और गर्म साँसें सीधे सृष्टि के चेहरे से टकरा रही थीं।
"बहुत हो गया तुम्हारा यह चिढ़ाना और शैतानी, madam..." कुणाल की भारी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ उसके कानों में गूँजी, "आई एम गोना टेक यू राइट हियर!"
सृष्टि
के होंठों पर एक कामयाब और नटखट मुस्कान फैल गई, क्योंकि वह अपनी इस जीत का ही तो इंतज़ार कर रही थी।



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