कुणाल की आँखों में जलती हुई इच्छा साफ़ दिख रही थी। उन्होंने सृष्टि की कलाइयों को और कसकर दबाया, फिर झुककर उसके होंठों को अपने होंठों से ढक लिया।
यह कोई हल्की kiss नहीं था—गहरा, भूखा, और बेकाबू। उनकी जीभ सृष्टि के होंठों को चीरती हुई अंदर घुस गई, उसकी मिठास को चखते हुए। सृष्टि ने कराहते हुए उनके मुँह में अपनी जीभ मिला दी। कार के अंदर सिर्फ़ उनके होंठों की गीली आवाज़ें और भारी साँसें गूँज रही थीं।

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