कार के अंदर का माहौल अब बेहद शांत और सुकून भरा हो चुका था। खिड़की के बाहर से आ रही ठंडी हवा के झोंके रात के सन्नाटे में मद्धम सरसराहट पैदा कर रहे थे। कुणाल ने सृष्टि को अपनी सीने से लगा रखा था और बेहद प्यार से उसके बिखरे बालों को उंगलियों से सहला रहे थे।
सृष्टि की आँखें हल्की सी मुंदी हुई थीं और उसके चेहरे पर एक गहरी तृप्ति और मासूमियत भरी मुस्कान तैर रही थी। वह अपनी ठुड्डी कुणाल की चौड़ी छाती पर टिकाकर सीधे उनकी भूरी आँखों में झांक रही थी।

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