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My professor is my sugar daddy

अगली सुबह, जब रॉयल एम्पायर यूनिवर्सिटी का ज़ूलॉजी डिपार्टमेंटुल गुलज़ार था, तभी फर्स्ट ईयर की क्लास में एक जूनियर प्रोफ़ेसर अचानक अंदर आए। उनके हाथ में एक ऑफिशियल नोटिस था, जिसे देखते ही पूरे क्लासरूम में कानाफूसी और उत्साह की लहर दौड़ गई।

"डिफ़ार्टमेंट की तरफ़ से एक बहुत ही ज़रूरी अनाउंसमेंट है," जूनियर प्रोफ़ेसर ने बोर्ड के पास खड़े होकर ऐलान किया। "आने वाली 18 सितंबर को—यानी ठीक दो दिन बाद—फर्स्ट सेमेस्टर के सभी स्टूडेंट्स को फील्ड स्टडी (Field Study) के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Islands) के जंगलों में ले जाया जा रहा है। वहाँ पाए जाने वाले दुर्लभ फ्लोरा और फ़ौना (Flora and Fauna) पर आप सभी को एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी। और सबसे खास बात यह है कि इस पूरी फील्ड स्टडी ट्रिप के हेड इंचार्ज खुद हमारे डिपार्टमेंट के हेड, प्रोफ़ेसर कुणाल मल्होत्रा होंगे!"

यह सुनते ही पूरा क्लासरूम खुशी से झूम उठा। रिया और तान्या आपस में फुसफुसाने लगीं—"अंडमान! यार, समुद्र, बीच और घने जंगल! और ऊपर से सर खुद इंचार्ज हैं... मज़ा आ जाएगा!"

क्लास खत्म होने के बाद, जहाँ बाकी स्टूडेंट्स ट्रिप की तैयारियों में जुट गए थे, वहीं सृष्टि के कदम खुद-ब-खुद प्रोफ़ेसर कुणाल के केबिन की तरफ़ मुड़ गए। उसके चेहरे पर एक अलग ही नटखट मुस्कान थी।

सृष्टि ने बिना एक पल गँवाए केबिन का दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रखा। अंदर का नज़ारा थोड़ा अलग था। प्रोफ़ेसर कुणाल अपनी लेदर चेयर पर बैठे हुए थे और अपने लैपटॉप पर किसी यूनिवर्सिटी ऑफिशियल या टूर कोऑर्डिनेटर के साथ वीडियो कॉल पर अंडमान ट्रिप की तैयारियों को लेकर गंभीर चर्चा कर रहे थे। कैमरे के सामने कुणाल का वही सख्त और फॉर्मल अंदाज़ था।

सृष्टि को उम्मीद थी कि अंदर आते ही कुणाल उसकी तरफ़ देखेंगे, लेकिन वे वीडियो कॉल में व्यस्त थे। यह देखकर सृष्टि का तुरंत एक प्यारा सा पाउट (pout) बन गया—ये क्या बात हुई? मैं आई हूँ और ये किसी और से बात कर रहे हैं!

लेकिन उसका वह नाराज़ पाउट ज़्यादा देर टिक नहीं पाया। जैसे ही उसकी नज़र कुणाल की बड़ी सी डार्क वुडन डेस्क पर पड़ी, वहाँ एक खूबसूरत सा गिफ्ट रैप रखा था—और उसके ऊपर रखी थी उसकी ऑल-टाइम फेवरेट बेल्जियन डार्क चॉकलेट!

सृष्टि का गुस्सा पलभर में कपूर की तरह उड़ गया। उसके चेहरे पर एक चमक आ गई। उसने बिना आवाज़ किए आगे बढ़कर वह चॉकलेट उठाई, और साथ ही डेस्क पर रखा कुणाल का पर्सनल फोन भी अपने हाथ में ले लिया।

वह इठलाती हुई सीधे केबिन के कोने में रखे बड़े से लेदर सोफ़े की तरफ़ गई और आराम से पालथी मारकर बैठ गई।

कुणाल अभी भी वीडियो कॉल पर बिजी थे और गंभीर लहजे में कह रहे थे, "...हाँ, शेड्यूलिंग बिल्कुल पक्की होनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है..."

कैमरे की ओट से कुणाल ने तिरछी नज़रों से देखा कि सृष्टि अंदर आ चुकी है। उन्होंने मन ही मन राहत की साँस ली कि चलो, आज उनकी नटखट जान ने बिना नॉक किए आने के बाद भी कोई बड़ा तमाशा नहीं किया।

सोफे पर बैठी सृष्टि ने बड़े चाव से चॉकलेट का रैप खोला और उसका एक टुकड़ा मुँह में रख लिया। चॉकलेट की मिठास उसके मुँह में घुलते ही उसने कुणाल का पर्सनल फोन अनलॉक किया ( पासवर्ड उसे पहले से ही पता था!) और उसमें अपना पसंदीदा गेम खेलने लगी। वह पूरी तरह बेफिक्र होकर मजे से गेम खेलने में मशगूल थी, बिना कुणाल के ज़रूरी काम में कोई खलल डाले।

वीडियो कॉल पर बात करते-करते जब कुणाल की नज़र सोफे पर बैठी सृष्टि पर पड़ी—जो एक पैर हिलाते हुए बड़े मजे से चॉकलेट खा रही थी और उनके ही फोन में गेम खेल रही थी—तो उनके गंभीर चेहरे पर अचानक एक बहुत ही प्यारी और मंद मुस्कान तैर गई। प्रोफेशनल मीटिंग के बीच अपनी महबूबा की इस मासूम और बेपरवाह अदा को देखकर उनका दिल मचल उठा। उन्होंने मन ही मन सोचा—यह लड़की कभी नहीं सुधरेगी!

कुछ ही मिनटों बाद कुणाल ने टूर कोऑर्डिनेटर के साथ अपनी वीडियो कॉल खत्म की, कुछ ज़रूरी निर्देश दिए और लैपटॉप बंद कर दिया।

कैमरा बंद होते ही उनके चेहरे का वह सख्त और औपचारिक नकाब उतर गया और आँखों में अपनी चुलबुली जान को देखने की चमक लौट आई। वे अपनी लेदर चेयर से उठे और भारी, सधी हुई चाल से चलते हुए उस बड़े से लेदर सोफे के पास आ गए, जहाँ सृष्टि टाँगें फैलाकर बड़े आराम से गेम खेल रही थी और चॉकलेट का मज़ा ले रही थी।

कुणाल ने झुककर एक झटके में उनके हाथ से अपना फोन खींच लिया और अपनी गहरी, मदहोश आवाज़ में बोले, "अच्छा जी! मेरी ऑफिशियल मीटिंग के दौरान मेरे ही फोन पर गेमिंग चल रही है, और मेरी ही डेस्क से मेरी लाई हुई इकलौती चॉकलेट पर डाका डाला जा रहा है, मिस शर्मा?"

सृष्टि ने बिल्कुल नहीं घबराई। उसने अपनी बड़ी-बड़ी भूरी आँखें मटकाईं, एक प्यारा सा पाउट बनाया और फोन वापस पाने के लिए कुणाल के कोट की बांह पकड़ ली।

"तो आप वीडियो कॉल में इतने ज़्यादा बिजी जो थे! मुझे आते ही इग्नोर कर रहे थे ना?" सृष्टि ने अपनी नटखट आवाज़ में शिकायत की, "तो सजा तो मिलनी ही थी न डैडी! वैसे... चॉकलेट बहुत अच्छी है, थैंक यू!"

कुणाल अपनी हँसी नहीं रोक पाए। उन्होंने एक हाथ से सोफे के हत्थे पर सहारा लिया और दूसरे हाथ से सृष्टि की पतली कमर को पकड़कर उसे अपनी तरफ़ खींच लिया। वे उसके ठीक ऊपर झुक गए, जिससे दोनों के चेहरों के बीच की दूरी बस कुछ ही इंच रह गई। उनकी गर्म साँसें सृष्टि के गालों को छू रही थीं।

"अच्छा, मुझे सजा दे रही हो?" कुणाल की आवाज़ में एक अजीब सा अपनापन और नशा था। "वैसे, अभी-अभी डिपार्टमेंट में जो अनाउंसमेंट हुई है, उसके बारे में क्या ख्याल है? अंडमान और निकोबार के जंगलों की ट्रिप के बारे में सुना या नहीं?"

सृष्टि की आँखें खुशी और एक्साइटमेंट से चमक उठीं। उसने अपनी दोनों बाहें कुणाल की गर्दन में डाल दीं और चहकते हुए बोली, "सुना है! और मुझे यह भी पता है कि इस पूरी फील्ड स्टडी ट्रिप के हेड इंचार्ज खुद मेरे 'डैडी' यानी प्रोफ़ेसर कुणाल मल्होत्रा हैं!" उसने आँख मटकाकर आगे कहा, "वहाँ तो बीच होंगे, नीला समंदर होगा और घने जंगल... वहाँ तो बहुत मज़ा आएगा!"

कुणाल ने उसके माथे पर अपनी उंगलियों से हल्के से टपली मारी और मुस्कुराकर बोले, "मज़ा तो आएगा, लेकिन यह मत भूलो कि मैं उस ट्रिप का हेड-इंचार्ज हूँ। वहाँ तुम्हें यूनिवर्सिटी के नियमों के हिसाब से चलना होगा, किसी आम स्टूडेंट की तरह।"

सृष्टि ने मुँह बनाते हुए अपनी नाज़ुक उंगलियों से कुणाल के कोट के कॉलर को सहलाया और बोली, "अच्छा? यानी वहाँ भी आप मुझे सबके सामने 'मिस शर्मा' कहकर डाँटेंगे? अगर ऐसा हुआ, तो मैं सच कह रही हूँ डैडी, मैं रात को चुपचाप आपके टेंट में आ जाऊँगी!"

सृष्टि की इस बेबाक और बो'ल्ड बात पर कुणाल की आँखें एक पल के लिए फैल गईं। उन्होंने अपने होंठों पर एक खतरनाक और शरारती मुस्कاन सजाते हुए सृष्टि के कान के पास झुककर फुसफुसाया—

"तैयार रहना फिर... क्योंकि अंडमान के उन सुनसान जंगलों और रिसॉर्ट में कोई केबिन का दरवाज़ा नहीं होगा, सिर्फ तुम और मैं होंगे। तब देखता हूँ कि तुम मुझे कैसे चिढ़ाती हो।"

कुणाल की इन गहरी और कामु'क बातों से सृष्टि के गालों पर हया की लाली फैल गई। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने अपनी नज़रों को झुका लिया, लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि वह उस आने वाले एडवेंचर के लिए अंदर से कितनी बेताब थी।

कुणाल ने प्यार से उसकी ठोड़ी को छुआ, सीधे हुए और बोले, "चलो अब अपनी क्लास में जाओ, वरना तुम्हारे बाकी लेक्चर्स मिस हो जाएंगे और शाम को पार्किंग में मिलते हैं।"

सृष्टि ने एक नटखट मुस्कान के साथ कुणाल का फोन उन्हें वापस दिया, उनकी गाल पर एक हल्का सा किस किया और अपनी शर्ट और स्कर्ट को ठीक करती हुई फुर्ती से केबिन से बाहर निकल गई। कुणाल अपनी जगह खड़े होकर बस अपनी इस नटखट और दिल की धड़कन बन चुकी लड़की को

जाते हुए देखते रहे—दो दिन बाद का वह सफर अब उनके लिए भी बेहद खास होने वाला था।

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Sakuntala Koiry

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"By day, I crunch numbers. By night, I craft darkness. Meet Sakuntala Koiry , teacher, and dark romance author, where shadows meet seduction." Meri stories meri khud ki likhi hui hai please ise koi copy na kare..

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