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My Best Friend's uncle

रात का आसमान काला था, जैसे किसी ने सितारों को डराकर भगा दिया हो। शहर के बाहरी इलाक़े में फैली वीरानी में बस एक आवाज़ गूंज रही थी—SUV के इंजन की गहरी गरज। धूल के बादल में काले काफ़िले की हेडलाइटें ऐसे चमक रही थीं मानो अंधेरे को चीरकर अपना इलाका चिन्हित कर रही हों।

सबसे आगे वाली SUV रुकती है। दरवाज़ा धीरे से खुलता है।

6 फीट 3 इंच लंबा, चौड़े कंधों वाला एक शख़्स बाहर निकलता है—काला सिलाईदार सूट, कलाई पर पुरानी स्टील की घड़ी, और दाहिनी भौं के ऊपर एक पुराना जख़्म का निशान।

उसकी आँखें—स्लेट-ग्रे, ठंडी और गहरी—ऐसी कि कोई भी सीधा देखे तो अपनी रूह तक नग्न महसूस करे।

उसके कदम ज़मीन पर पड़ते हैं, और लगता है जैसे हवा भी थम गई हो। पीछे खड़े आदमी हथियार संभालते हैं, पर सच यह है कि असली हथियार तो सामने खड़ा वही शख़्स है—**देवराज सिंह रायज़ादा**।

कभी रियासत का वारिस, अब डर और ताक़त का बादशाह। शहर के हर सौदे, हर गली, हर साँस पर उसका नाम लिखा है।

वो पास आता है, और सामने खड़े काँपते आदमी के कान के पास झुककर बस एक ठंडी आवाज़ में कहता है—

*"मेरे सामने रास्ता चुनने का सिर्फ़ एक हक़ है… या तो मेरे साथ, या मेरे नीचे।"*

और उसी पल, अंधेरा और गहरा हो जाता है।

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उसका नाम **आर्या** था।

चेहरे पर एक ऐसी मासूमियत, जो भीड़ में भी अलग चमके—जैसे सुबह की पहली धूप। बड़ी-बड़ी बादामी आँखें, जिनमें एक अलग ही सच्चाई और भरोसा था। नाज़ुक कद-काठी, गोरा रंग, और लंबे, रेशमी काले बाल, जो अक्सर उसकी किताबों पर झुकते हुए कंधों से फिसल जाते।

बचपन से ही पढ़ाई में कमाल—स्कूल में हर साल अव्वल, लेकिन किस्मत के इम्तिहान उससे और कठिन थे। माँ-बाप बचपन में ही चल बसे, और तब से मामा-मामी के घर पली-बढ़ी।

अब कॉलेज के लिए शहर आई थी—सपनों, उम्मीदों और थोड़े डर के साथ।

कॉलेज में उसकी सबसे अच्छी दोस्त बनी **अनाया रायज़ादा**—शरारती, खुली सोच वाली, और अपनी ही दुनिया में रहने वाली। जब आर्या को हॉस्टल या पीजी में जगह नहीं मिली, तो अनाया ने हँसते हुए कहा—

*"तू पागल है? मेरे घर आ जा… रायज़ादा हाउस में तेरे लिए पूरा एक कमरा खाली है।"*

आर्या ने पहले झिझक दिखाई, लेकिन फिर मान गई।

जब वो रायज़ादा हवेली के बड़े गेट से अंदर आई—चारों तरफ़ ऊँची दीवारें, पुराना लेकिन शाही आर्किटेक्चर, हर कोने में सिक्योरिटी, और बीच में एक ऐसा बाग़ीचा जो मानो किसी और दौर का हो—तो उसे लगा जैसे उसने किसी और ही दुनिया में कदम रख दिया हो।

अंदर उसका स्वागत अनाया की मम्मी-पापा, उसका छोटा भाई और दादी ने किया। सबने उसे प्यार से अपनाया, जैसे वो इस घर की ही बेटी हो।

लेकिन एक शख़्स से उसकी अब तक मुलाक़ात नहीं हुई थी।

वो शख़्स, जिसकी मौजूदगी से इस हवेली का हर कोना चुप हो जाता था।

**देवराज सिंह रायज़ादा**।

अनाया के चाचा… आर्या से पूरे 18 साल बड़े।

उसका नाम सुनते ही घर में एक अलग-सी गंभीरता आ जाती थी।

आर्या नहीं जानती थी कि जिस घर में वो पनाह लेने आई है, वही घर उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी हलचल की वजह बनने वाला है।

और इस कहानी में उनकी पहली नज़र—एक इ

त्तेफ़ाक़ नहीं, किस्मत का लिखा था।

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Sakuntala Koiry

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"By day, I crunch numbers. By night, I craft darkness. Meet Sakuntala Koiry , teacher, and dark romance author, where shadows meet seduction." Meri stories meri khud ki likhi hui hai please ise koi copy na kare..

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