सुबह हवेली का आँगन हमेशा की तरह चहल-पहल से भरा था। गार्ड्स, ड्राइवर, और नौकर अपनी-अपनी ड्यूटी में लगे थे।
आर्या अनाया के साथ लॉन में बैठी चाय पी रही थी, तभी सामने के गेट पर हलचल मच गई।
दो गार्ड्स के बीच एक आदमी खड़ा था—हवेली का पुराना ड्राइवर।
उसका चेहरा पसीने और घबराहट से भीगा था।
तभी दरवाज़ा ज़ोर से खुला और **देवराज सिंह रायज़ादा** बाहर आया—आज डार्क ब्लू थ्री-पीस सूट में, चेहरे पर सख़्त छाया।
*"मेरे भरोसे का क्या मतलब है अगर तुम मुझसे झूठ बोलो?"*
उसकी आवाज़ इतनी भारी और गूंजदार थी कि हवा में ठंडक आ गई।
ड्राइवर हकलाने लगा, *"स… साहब, मेरी मं… मंशा—"*
देवराज ने तेज़ी से उसकी बात काट दी,
*"मंशा? मंशा से पेट नहीं भरता… भरोसे से भरता है। और तूने उसे तोड़ दिया।"*
उसकी आँखों में ऐसा गुस्सा था कि पास खड़े गार्ड्स भी नज़र झुका चुके थे।
देवराज ने हाथ के इशारे से उसे हटाने का आदेश दिया, और गार्ड्स उसे लेकर चले गए।
ये सब देखकर आर्या का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
उसने कभी किसी को इतना खतरनाक और काबू में गुस्सा करते नहीं देखा था।
उस पल उसे याद आया—ये वही शख़्स है जिससे पूरा शहर डरता है।
उस दिन भर आर्या ने कोशिश की कि वो देवराज से दूर रहे—डाइनिंग हॉल में अलग कुर्सी, लिविंग रूम में आने पर चुपचाप अपने कमरे में जाना…
देवराज ने यह बदलाव नोटिस किया।
शाम को जब सब डिनर के लिए टेबल पर बैठे, वो जानबूझकर आर्या के पास आया और धीमे स्वर में बोला,
*"सुबह जो देखा… वो सिर्फ़ उनका था, तुम्हारा नहीं।"*
आर्या ने नज़रें झुका लीं, लेकिन कुछ कह नहीं पाई।
देवराज ने और पास झुककर कहा,
*"मैं जैसा बाकी लोगों के साथ हूँ… वैसा तुम्हारे साथ कभी नहीं होऊँगा। समझीं?"*
उसके शब्दों में एक अजीब-सी गहराई और भरोसा था।
आर्या ने पहली बार उसकी आँखों में सीधा देखा—गुस्से से भरे उस चेहरे के पीछे छुपा एक और चेहरा… जो शायद सिर्फ़ उसके लिए था।
---
आर्या
*"मैं जैसा बाकी लोगों के साथ हूँ… वैसा तुम्हारे साथ कभी नहीं होऊँगा। समझीं?"*
"मेरे साथ वैसा कभी नही होंगे इससे उनका क्या मतलब था "
आर्या देवराज की बातो मे गोम थी
"ये क्या हो रहा है मुझे क्या मुझें मेरे बेस्ट फ्रेंड के अंकल अच्छे लग रहे है...... *
आर्या अपने चेहरे को किताब के पन्नो के बिच छुपा लेती है
" नही नही ye गलत है आर्या वह तुझसे कितने बड़े है ओर या मैं कुछ ज्यादा हि सोच रही हो सायद तुझे वो अपनी भतीजि जैसा हि समझते इसिलए ye सब..... उफ़ हो ye क्या हो रहा है मुझें मुझसे बड़ा आदमि इतना क्यू अच्छा लग रहा.... ye लोग कितने अच्छे है ye सोचेंगे मेरे बारे मे.... देवराज जी क्या सोचेंगे..... उफ़ आर्या तु ज्यादा सोच रही है देवरज जैसा cruel इंसान के सीने मे दिल नही हो सकता और अगर होगा भी तोह मेरे लिए भला क्यू धड़केगा "
आर्या अपने बिचारो मे उलझी हुई थी और दुसरी तरफ़ देवराज अपनि ख्यालो मे
देवराज
"क्या मैं गलत नही कर रहा? आर्या मासूम है छोटी बच्चि, मेरी भतीजी की दोस्त ओर मैं.... तु देवराज सिंग राइज़ादा है तुझ से सरी दुनिया डरती है तेरे लिए प्यार का कोई जगह नही है".
देवराज अपने डेस्क पे jor से पंच मरता है
"फिर उसका तुझ से डरना इतना कोई फर्क परता है.... तुम क्या हो आर्या? तुम्हारी हर हरकत से मुझें क्यू फर्क पड़ रहा है ? तुम क्या कर रही हो मेरे साथ? नही मुझें खुद कु रुकना होगा तुम जैसी मासूम लड़की के लिए मेरी ye दुनिया नही है . तुम इस दुनिया की सरी खुशियाँ डेसेर्वे करती हो। मेरे इस दुनिता मे सिर्फ दर्द है जो तुम्हारे लिए बिल्कुल नही है ।
रात का समय
आसमान में बिजली चमक रही थी पानी की बॉन्डे आर्या को भिगो रही थी। आर्या आंखे बंद कर खुदको भीगा रही थी जैसे अपनी सरे बिचारो को भी धो दे
"आप क्या हो देवराज ? मेरे बिचारो पे सिर्फ आपका राज है। अब मेरी दिल की धड़कने जैसे सिर्फ आपकी नाम की माला जप रही।
"बारिश में इतना भीगना सेहत के लिये अच्छा नही है आर्या" पिछे से आयी सेडक्टिव भारी आवाज़ से प्रिया पिछे उड़ती है और देवराज को देख शॉक्ड हो जाति है
"आ .. आप... ई इस बक्त ... य यहा कैसे" आर्या की आवाज़् जैसे उसकी साथ ना दे रही हो
"मैं कही भी कभी भी जा सकता हो आर्या"
देवराज के कदम अब आर्या की और बढ़ रहे थे। देवराज आर्या में इतनी करीब aur की वो दोनो एक दूसरे के सांसे मेहसूस कर रहे थे । दोनो एक दूसरे में ऐसे गुम थे जैसे दिया और बाती।
आर्या देवराज के सीने टक भी ठीक से नहीं पहुंच पा रही थी।देवराज झुकता है ओर आर्या के कान् के पास फूफुसता है
"क्या अभी भी डर लग रहा है"
आर्या ना में सिर हिलती है। देवराज खुदको और थोड़ा झुकता है । अब उन्के होठो के बिच बस कुछ हि संसो का फैसला था।
"और अब?" देवराज फिर पूछता है
आर्या फिर ना में सिर हिलती है। देवराज आर्या के बाल् को उसके कान के पिछे करता है। आर्या की आंखे बंद हो जाति है। देवराज आर्या को एक टक देखे जा रहा aur जैसे आर्या इस दुनिया की आखरी चीज़ हो और पालक झपकते हि गायब हो जाएगी।
"go to your room right now" devraj कि सख्त
आवाज़ आर्या को होश में लती है और आर्या एक सांस में अपनी रूम की एयर दौर लगा देती है ।



Write a comment ...