**अगला भाग:**
रात भर आर्या ठीक से सो नहीं पाई। करवटें बदलती रही, देवराज की आँखों की वो तीव्रता, उसका झुकना, कान में फुसफुसाना… सबकुछ जैसे उसकी पलकों के नीचे चलता रहा। जब नींद आई भी, तो वो किसी राहत की जगह नहीं बल्कि एक डरावने ख्वाब में बदल गई।
**सपने में**, वो खुद को एक अंधेरे कमरे में पाती है। कोई उसकी तरफ बढ़ रहा है, चेहरा नहीं दिख रहा... बस तेज़ साँसें सुनाई देती हैं। आर्या पीछे हटती है, दीवार से टकरा जाती है और अचानक वही सख्त आवाज़...
**"GO TO YOUR ROOM RIGHT NOW!"**
आर्या चीखते हुए उठ बैठती है। पसीने में भीगी हुई, साँसें तेज़... उसकी नज़र दीवार पर जाती है — घड़ी सुबह के 5 बजा रही थी।
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**अगली सुबह:**
देवराज कार के पास खड़ा था, हमेशा की तरह शांत, सधा हुआ। उसकी भतीजी—Anaya—खुशमिजाज और बातूनी, हमेशा की तरह गुनगुना रही थी। आर्या धीरे-धीरे चलती हुई आई, बाल अभी भी गीले थे, शायद जल्दी-जल्दी नहाकर भागी थी।
देवराज ने एक नज़र उसे देखा — उसकी आँखों के नीचे काले घेरे, और चलने में हल्की तकलीफ़ — सब कुछ उसने नोट किया, मगर कुछ नहीं कहा।
पूरे रास्ते Anaya ही बोलती रही। देवराज बस सिर हिलाकर जवाब देता रहा। आर्या एकदम चुप। मगर हर पाँच सेकेंड में उसके मुँह से "आहछि" जैसी हल्की सी आवाज़ निकलती —
देवराज की निगाह बार-बार रियर व्यू मिरर में जाती रही — आर्या की ओर।
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**शाम को:**
कॉलेज से छुट्टी के समय देवराज फिर आया। दोनों लड़कियाँ गेट पर खड़ी थीं। अनाया दौड़कर कार में बैठ गई, मगर आर्या अभी भी लड़खड़ा रही थी, और बैठते वक़्त फिर हल्की छिख निकली।
अब देवराज ने कुछ नहीं कहा। सीधे अनाया को पहले घर छोड़ा।
**"तुम्हारे लिए खाना रखा है, फ्रिज में। मम्मी आएँगी तब तक कुछ खा लेना,"** ये कहकर उसने सान्वी को उतारा और कार वापस मोड़ दी।
**"आर्या,"** उसने शांत मगर गम्भीर लहजे में कहा,
**"हमें सीधे हॉस्पिटल जाना होगा। ये अब मज़ाक की बात नहीं है।"**
आर्या ने नज़रें झुका लीं। अब विरोध करने की भी हिम्मत नहीं थी। शायद उसे खुद भी अंदाज़ा था कि वो अब ज्यादा देर तक दर्द छुपा नहीं पाएगी।
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**(अगला दृश्य – हॉस्पिटल में)**
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देवराज ने गाड़ी एमरजेंसी की पार्किंग में रोकी। बिना एक शब्द कहे उसने आर्या का दरवाज़ा खोला।
आर्या उतरने लगी तो उसकी साँस फिर अटक गई — इस बार दर्द जैसे हड्डियों में उतर गया था।
देवराज ने आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लिया। आर्या चौंकी, मगर विरोध नहीं किया। शायद अब थक चुकी थी।
**अंदर – चेकअप रूम में:**
डॉक्टर ने पहले बेसिक चेकअप किया, फिर देवराज की ओर देखा।
**"Mr. Devraj, what happened exactly?"**
देवराज ने सिर नीचे किया, फिर शांत स्वर में बोला,
**"कल बारिश में भीग गई थी, फिर सीधे कॉलेज... आज पूरा दिन दर्द में थी।"**
डॉक्टर ने आर्या की पीठ देखी — उसकी शर्ट के नीचे गीलेपन से फटी हुई स्किन, सूजन और हल्की बुखार की झलक साफ थी।
**"You should have brought her earlier. This is not just body ache. There's a risk of infection."**
आर्या की आँखें नम हो गईं। दर्द अब सिर्फ शरीर में नहीं था, आत्मा तक उतर गया था। और देवराज… उसे खुद पर गुस्सा आने लगा।
**"Admit her for observation. Fever is climbing. We'll do a few tests to rule out any complications."**
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**कुछ घंटे बाद – हॉस्पिटल रूम में:**
आर्या बेड पर लेटी थी, उसकी बाजू में ड्रिप लगी हुई थी। खिड़की के पास रखी कुर्सी पर देवराज बैठा था।
काफी देर तक दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई।
फिर अचानक देवराज बोल पड़ा:
**"मुझे नहीं पता तुमसे कैसे बात करनी है…"**
**"लेकिन ये बात समझ लो आर्या, जब तुम दर्द में होती हो तो मुझे लगता है… जैसे कोई अंदर से जकड़ रहा हो।"**
आर्या ने धीरे से आँखें खोलीं। उसकी पलकें भारी थीं, मगर दिल हल्का हो रहा था।
**"मैं ठीक हूँ..."** उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी।
देवराज ने झुककर उसका माथा छुआ — हल्का बुखार अभी भी था।
फिर पहली बार, बहुत धीमे स्वर में कहा:
**"झूठ मत बोलो... ये बात अब मुझे सहनी नहीं आती।"**
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**(डॉक्टर की रिपोर्ट)**
कुछ देर बाद नर्स ने अंदर आकर कहा:
**"Report आ गई है। Infection है, मगर गहरा नहीं। Timely treatment से सब ठीक हो जाएगा। पर दो दिन हॉस्पिटल में रखना पड़ेगा।"**
देवराज ने राहत
की साँस ली। और धीरे से बोला:
**"Stay. मैं यहीं रहूँगा, जब तक तुम ठीक नहीं हो जाती।"**
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