देवराज का माथा अब भी आर्या के माथे से टिका हुआ था।
कमरे में बस उनकी साँसों की आवाज़ थी।
आर्या की पलकों में हल्की कंपकंपी थी, और देवराज की उंगलियाँ अब भी उसके चेहरे को ऐसे थामे हुए थीं जैसे वो कोई बेहद नाज़ुक चीज़ हो।
कुछ पल बाद देवराज ने धीरे से उसकी आँखों के ऊपर अपने होंठ रखे।
पहले एक आँख…
फिर दूसरी।
आर्या हल्के से सिहर गई।
देवराज की साँस उसके चेहरे पर बिखर रही थी।
उसने बहुत धीरे से उसकी नाक के पास, फिर गालों पर छोटे-छोटे चुम्बन रखे।
आर्या की उंगलियाँ उसकी शर्ट को और कसकर पकड़ चुकी थीं।
देवराज ने रुककर उसे देखा।
उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी —
**“First kiss?”**
आर्या का चेहरा तुरंत लाल हो गया।
उसने झिझकते हुए धीरे से हाँ में सिर हिला दिया।
कुछ सेकंड तक देवराज बस उसे देखता रहा।
उसकी आँखों में उस पल एक अजीब-सी softness थी…
जैसे कोई बहुत कीमती एहसास उसके सामने खड़ा हो।
फिर उसने आर्या को धीरे से अपनी बाँहों में खींच लिया।
इतना संभालकर…
जैसे वो सच में काँच की बनी हो।
आर्या का चेहरा उसके सीने से लग गया।
उसे देवराज की धड़कन साफ़ सुनाई दे रही थी —
तेज़।
बेचैन।
लेकिन सुकून भरी।
देवराज ने उसके बालों में चेहरा छुपाते हुए फुसफुसाया —
**“Then I’ll make it special…”**
आर्या ने धीरे से ऊपर देखा।
देवराज झुका…
और इस बार उसके होंठ बहुत नरमी से आर्या के होंठों को छू गए।
बस एक छोटा-सा, ठहरा हुआ चुम्बन।
लेकिन आर्या के लिए जैसे पूरी दुनिया वहीं रुक गई।
उसकी साँस काँप गई।
देवराज थोड़ा पीछे हटकर उसे देखने लगा —
जैसे उसके हर reaction को अपने अंदर उतार लेना चाहता हो।
आर्या की आँखें बंद थीं।
गाल लाल थे।
और उंगलियाँ अब भी उसकी शर्ट पकड़े हुए थीं।
देवराज हल्का-सा मुस्कुराया।
**“Sunshine…”**
उसने पहली बार ये नाम इतने प्यार से कहा कि आर्या का दिल फिर से धड़क उठा।
फिर उसने उसे दोबारा अपने करीब खींच लिया।
इस बार चुम्बन थोड़ा लंबा था…
थोड़ा गहरा…
मगर अब भी बेहद संभला हुआ।
आर्या धीरे-धीरे उसकी warmth में खोती चली गई।
बाहर हवा तेज़ चल रही थी।
पर्दे उड़ रहे थे।
और हवेली के उस कमरे में,
दो लोग पहली बार अपने एहसासों को छुपाना छोड़ रहे थे।
कुछ देर बाद देवराज ने उसका माथा चूमते हुए आँखें बंद कर लीं।
**“तुम सच में मुझे पागल कर दोगी…”**
आर्या हल्के से मुस्कुरा दी।
और उसी पल देवराज ने उसे फिर से अपनी बाँहों में छुपा लिया —
जैसे अब दुनिया से सबसे ज़्यादा संभालकर रखने वाली चीज़ वही हो।
उसने आर्या के होंठों को फिर से अपनी नरम पकड़ में लिया। पहले तो बस हल्के-हल्के चुम्बन… जैसे कोई स्वाद चख रहा हो जो उसे कभी नहीं भूलना है। धीरे-धीरे वो चुम्बन गहरा होता गया। आर्या की साँसें काँपने लगीं। देवराज ने एक हाथ उसके गाल पर रखा, अँगूठे से हल्के से उसकी निचली होंठ को सहलाया।
फिर अचानक रुक गया।
उसकी आवाज़ भारी और गहरी थी, लगभग फुसफुसाहट में डूबी हुई —
**“Part your lips for me, sunshine…”**
आर्या की आँखें आधी बंद थीं। शर्म और चाहत के मिश्रण में उसका चेहरा गुलाबी हो चुका था। उसने धीरे से होंठ अलग कर दिए।
देवराज ने एक पल उसे देखा — जैसे वो इस पल को अपनी आत्मा में उतार लेना चाहता हो — फिर झुका। उसकी जीभ आर्या के होंठों के बीच सरक गई। गर्म, नरम और धीमी गति से। आर्या का शरीर एक झटके से सिहर गया। उसने अनजाने में देवराज की शर्ट को और कसकर पकड़ लिया।
आर्या ने भी हिचकिचाहट के साथ जवाब दिया। उसकी जीभ अनाड़ी लेकिन भावुक तरीके से देवराज की जीभ से टकराई। चुम्बन अब और गहरा, और भूखा होता जा रहा था। कमरे में सिर्फ उनकी साँसों की तेज़ आवाज़ और होंठों की नमी वाली ध्वनि गूँज रही थी।
आर्या की गर्दन पीछे की ओर झुक गई। उसका पूरा शरीर देवराज के सीने से चिपक गया। उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। देवराज ने एक हाथ उसके कमर पर रखकर उसे और कसकर अपने से लगा लिया।
तभी आर्या के गले से एक हल्की, अनियंत्रित सी आवाज़ निकली — **“Ahh…”**
देवराज ने तुरंत चुम्बन तोड़ा। उसकी आँखें अब और गहरी, और भूखी हो चुकी थीं। वो आर्या के होंठों के बहुत करीब था, साँसें एक-दूसरे पर पड़ रही थीं।
**“Do that again…”** उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी माँग थी, **“Mo@n for me again, sunshine.”**
आर्या कुछ कह पाती, उससे पहले देवराज ने फिर से उसके होंठों पर कब्ज़ा कर लिया। इस बार चुम्बन और भी inte'nse था। जीभें एक-दूसरे में गुँथ गईं। देवराज ने उसे ऐसे चूमा जैसे वो आर्या को पूरी तरह अपने अंदर समो लेना चाहता हो। आर्या की उंगलियाँ अब उसके बालों में खो गईं। उसका शरीर देवराज के स्पर्श से काँप रहा था — घुटनों में कमज़ोरी, पेट में गर्म लहरें, और सीने में धड़कनें जो काबू से बाहर हो रही थीं।
फिर से वो मधुर, काँपती हुई आवाज़ निकली — **“Mmm… ahh…”**
देवराज ने चुम्बन और गहरा कर दिया। उसकी जीभ आर्या के मुँह के हर कोने को छू रही थी। कुछ पल बाद जब दोनों की साँसें पूरी तरह हाँफने लगीं, तो उसने होंठ अलग किए।
**“तुम मुझे पागल बना रही हो, sunshine…”** उसने काँपती हुई आवाज़ में कहा, माथा फिर से आर्या के माथे से सटाते हुए।
फिर उसने आर्या की ठुड्डी को हल्के से ऊपर उठाया। उसके होंठ अब आर्या की नरम गर्दन पर उतर आए। पहले तो हल्के-हल्के चुंबन, फिर धीरे-धीरे चू'सने लगा। गीली, गर्म साँसें उसकी त्वचा पर फैल रही थीं। आर्या का सिर पीछे झुक गया। उसकी उंगलियाँ देवराज के बालों में कस गईं।
देवराज ने उसकी गर्दन पर एक गहरा चुंबन देते हुए फुसफुसाया, आवाज़ में कब्जे वाली मिठास थी —
**“Tell me… whose lips are these?”**
उसने आर्या के निचले होंठ को हल्के से काटा।
**“Whose mo@ns are these?”**
आर्या की साँस रुक-रुक कर निकल रही थी। उसकी आँखों में नमी थी, लेकिन वो नजरें देवराज से हटा नहीं पा रही थी।
देवराज ने उसे और करीब खींचा, उसकी कमर पर हाथ कसते हुए, उसके कान में धीरे से बोला —
**“Bolo, Arya… sab kuch mera hai ना?”**
बाहर हवा और तेज़ हो गई थी। पर्दे उड़ रहे थे। अंदर, हवेली के उस कमरे में, दो दिलों के बीच की दीवारें धीरे-धीरे पूरी तरह गिर रही थीं।
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