देवराज की आवाज़ में जो हक था, उसने आर्या के अंदर जैसे एक ज्वाला सुलगा दी थी। उसकी गर्दन पर देवराज के गर्म होंठों और हल्के से दांतों के चुभने ने उसे दुनिया और ज़माने से बेखबर कर दिया था।
आर्या ने अपनी काँपती हुई आँखें खोलीं, जो धुंधली और चाहत से भरी थीं। उसने देवराज के चेहरे को अपनी हथेलियों में भरा और बेहद धीमी, टूटी हुई आवाज़ में फुसफुसाया—

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