ओलिवर की इस दबंग और हक जताने वाली बात पर सेबेस्टियन की एक धीमी, जानलेवा मुस्कान छूट गई।
उसने अपनी पकड़ दिव्या के हाथ पर और मजबूत की, लेकिन उसकी आँखों में अब अपने छोटे भाई के लिए एक शरारती चमक थी। पूरी दुनिया को अपने इशारों पर नचाने वाले इस महाशक्तिशाली देश के दो सबसे खौफनाक मर्द इस वक्त एक भोली-भाली लड़की के दिल पर अपनी हुकूमत साबित करने के लिए आपस में ही मीठी तकरार कर रहे थे।
सेबेस्टियन ने अपनी एक भौंह उठाकर ओलिवर को चिढ़ाते हुए कहा, "हाँ, जानता हूँ कि ये तेरी भी बीवी है, लेकिन फ़िलहाल ये डरकर मेरे पास छिप रही है! तो मिस्टर एडीसी, ज़रा अपने इस मिलिट्री वाले कड़क एटीट्यूड को ढीला करो, वरना आज रात तुम्हें कमरे के बाहर पहरा देने की स्पेशल ड्यूटी भी मिल सकती है।"
ओलिवर ने सेबेस्टियन की बात सुनकर अपनी कलाई पर बंधी भारी घड़ी उतारी और उसे साइड टेबल पर रखते हुए एक दिलकश ठहाका लगाया। उसकी नज़रों में दिव्या के लिए छलकती बेइंतहा मोहब्बत साफ़ नज़र आ रही थी। वो बड़े ही रौब से चलकर बेड की दूसरी तरफ़ आ बैठा और दिव्या के बेहद करीब झुक गया।
ओलिवर ने दिव्या की ठुड्डी को अपनी उंगलियों से हल्के से थामते हुए चिढ़ाया, "ज़रा सुनिए मैडम! इतनी हिम्मत कि मेरे ही भाई की आड़ लेकर मुझसे बचोगी? और भैया, आप जो इसे इतनी सह दे रहे हो ना, ये सब जानती है कि किसे कैसे उंगलियों पर नचाना है। ज़रा पूछिए इससे, कल शाम जब मैं लेट आया था तो कौन कमरे में अकेले मुँह फुलाकर बैठा हुआ था?"
ओलिवर की यह बात सुनते ही दिव्या का चेहरा शर्म से बिल्कुल लाल हो गया। उसने झट से सेबेस्टियन के सीने में अपना चेहरा छिपा लिया और अपनी धीमी, मासूम आवाज़ में फुसफुसाई, "मैंने... मैंने कोई मुँह नहीं फुलाया था! आप झूठ बोल रहे हैं ओलिवर!"
दिव्या की इस बचकानी हरकत पर सेबेस्टियन अपनी हंसी रोक नहीं पाया। उसने दिव्या के रेशमी बालों को सहलाते हुए ओलिवर को घूरने का नाटक किया, "देखा ओलिवर? मेरी जान कह रही है कि तुम झूठ बोल रहे हो। और इस शीशमहल का पहला नियम याद है ना? दिव्या जो कहेगी, वही सच माना जाएगा!"
ओलिवर ने अपने दोनों हाथ हवा में उठाकर नाटकीय अंदाज़ में सरेंडर किया, "वाह राष्ट्रपति जी! सीधे-सीधे बीवी की तरफ़दारी? ये तो सरासर नाइंसाफ़ी है!" फिर ओलिवर थोड़ा और पास झुका और दिव्या के कान के पास अपनी गर्म साँसों के साथ फुसफुसाया, "पर कोई बात नहीं जान... आप सेबेस्टियन भैया के पीछे कितना भी छिप लो, रात अभी बहुत लंबी है। देखते हैं कि आपका यह रक्षक आपको मेरे प्यार से कब तक बचाता है!"
दिव्या की धड़कनें फिर से तेज़ हो गईं, लेकिन इस बार डर से नहीं, बल्कि दोनों भाइयों के इस बेइंतहा प्यार, अधिकार और मीठी छेड़छाड़ के अहसास से। उसने शर्माते हुए अपनी पलकें झुका लीं, जहाँ दुनिया के दो सबसे बेपरवाह 'डेविल्स' सिर्फ़ उसके एक बार मुस्कुरा देने का इंतज़ार कर रहे थे।
ओलिवर की इस खुली चुनौती और बहकाने वाली बातों पर सेबेस्टियन की आँखों में एक गहरी, मोहक चमक आ गई। उसने दिव्या को अपने सीने से धीरे से अलग किया और उसकी भीगी हुई, शर्माई हुई पलकों को बड़े प्यार से चूमा।
सेबेस्टियन ने अपनी भारी और मखमली आवाज़ में ओलिवर से कहा, "ओलिवर, इसे अब और मत सता। आज हमारी शादी की पहली रात है, और तू अपनी इन बातों से मेरी जान को और ज़्यादा परेशान कर रहा है।"
कहते हुए सेबेस्टियन ने आगे बढ़कर दिव्या के बालों में लगे भारी-भरकम गजरे और पिन को बड़े सलीके से खोलना शुरू कर दिया। दुनिया भर के बड़े-बड़े फैसले लेने वाले उन हाथों की नर्मी इस वक्त किसी कुशल कारीगर से भी ज़्यादा नाजुक थी। जैसे-जैसे भारी गहने उतर रहे थे, दिव्या के बदन का बोझ हल्का हो रहा था, लेकिन उसकी धड़कनें उतनी ही तेज़ी से मचलने लगी थीं।
तभी ओलिवर भी मुस्कुराते हुए दिव्या के ठीक सामने आ बैठा। उसने दिव्या के चेहरे पर बिखरी एक लट को अपनी उंगलियों से हटाते हुए, बेहद मदहोश अंदाज़ में फुसफुसाया,
"भैया ठीक कह रहे हैं... आज रात हम तुम्हें डराएंगे नहीं, जान। बल्कि तुम्हें इस बात का अहसास कराएंगे कि तुम इन दोनों डेविल्स की ज़िंदगी का इकलौता सुकून हो।"
और फिर, उस कड़ाके की ठंड और बर्फीली आंधी के बीच, उस आलीशान कमरे के भीतर प्यार का एक ऐसा समंदर उमड़ा, जहाँ सारी सीमाएं मिट गईं।
सेबेस्टियन ने धीरे से आगे झुककर अपने होंठ दिव्या के कोमल होंठों पर रख दिए—एक बेहद धीमा, गहरा और बेइंतहा प्यार से भरा हुआ चुंबन। वह सिर्फ़ एक स्पर्श नहीं था, बल्कि दुनिया के सबसे खतरनाक इंसान का अपनी मोहब्बत के आगे घुटने टेक देना था। दिव्या की आँखें खुशी और शर्म से बंद हो गईं, और उसके पतले हाथ खुद-ब-खुद सेबेस्टियन के कंधों पर टिक गए।
उसी पल, ओलिवर ने भी पीछे न रहते हुए दिव्या की कमर पर अपनी मजबूत और मालि"कान पकड़ बनाई, और उस रोमांस के सफर में अपना हक जताते हुए उस चुंबन को और अधिक गहरा कर दिया। दोनों भाइयों का वो साझा प्यार, वो जुनूनी अपनापन और वो मदहो'श कर देने वाली रात अब अपने परवान पर चढ़ रही थी, जहाँ बाहर बर्फ गिर रही थी
और अंदर दिलों की गर्मी से सारा आसमान पिघल रहा था।



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